भस्त्रिका प्राणायाम दूर भगाये साइनस खासी और जुकाम

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भस्त्रिका प्राणायाम से धमनियों को पर्याप्‍त मात्रा में रक्‍त मिलता है। इससे धमनियों में किसी तरह का ब्‍लॉकेज नहीं होता। इसके साथ ही फेफड़ों की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। भस्त्रिका प्राणायाम करने से शरीर में रक्‍त संचार सुचारू होता है। इससे शरीर के अवयव सही प्रकार काम करने लगते हैं। योग मुख्‍य रूप से रोग से बचाने की बात करता है और इलाज की बाद में। भस्त्रिका प्राणायाम करने के लिए दोनों हाथों को सीधा ऊपर उठायें। सांस अंदर लेते हुए ऊपर जाएं और सांस छोड़ते हुए नीचे आएं। आरंभ में इसे दस बार तक करना चाहिये। इसके बाद धीरे-धीरे आप इसकी संख्‍या बढ़ा सकते हैं। एक अन्‍य विधि के द्वारा भी भस्त्रिका किया जा सकता है। इसके लिए अपने हाथों को सामने की ओर करें। सांस भरते हुए दोनों हाथ कंधे के सामने लाएं और सांस छोड़ते हुए दोनों हाथ पीछे ले जाएं। आपकी दोनों कु‍हनियां कंधे के समांतर होनी चाहिये। इस प्राणायाम को धरती पर आसन बिछाकर ही किया जाना चाहिये।

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